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समस्तीपुर में क्राइम कंट्रोल पर सख्त हुए एसपी, थानाध्यक्षों को दिया एक्शन प्लान

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समस्तीपुर कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित मासिक जिला क्राइम मीटिंग में एसपी अरविंद प्रताप सिंह ने हत्या, लूट, साइबर अपराध, अवैध शराब, खनन और लंबित कांडों की समीक्षा करते हुए थानाध्यक्षों व पुलिस पदाधिकारियों को कई अहम निर्देश दिए।

समस्तीपुर/आलम की खबर:जिले में अपराध नियंत्रण, लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन और कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में जिला स्तरीय मासिक क्राइम मीटिंग आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता पुलिस अधीक्षक अरविंद प्रताप सिंह ने की, जिसमें जिले के सभी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, डीएसपी, अंचल निरीक्षक और विभिन्न थानों के थानाध्यक्ष मौजूद रहे। बैठक देर शाम तक चली, जिसमें मार्च माह के दौरान जिले में दर्ज अपराधों, उनकी प्रगति और पुलिस कार्रवाई की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि अपराध नियंत्रण के साथ-साथ मामलों के गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान और समयबद्ध निष्पादन पर अब और अधिक फोकस किया जाएगा।

बैठक में हत्या, लूट, गृहभेदन, वाहन चोरी, आर्म्स एक्ट, नारकोटिक्स और एनडीपीएस से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए एसपी ने संबंधित अधिकारियों से केसवार प्रगति रिपोर्ट ली। उन्होंने निर्देश दिया कि गंभीर प्रकृति के मामलों में अनुसंधान की रफ्तार और तेज की जाए तथा अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि जिले में घटित हर महत्वपूर्ण घटना पर तत्काल और पेशेवर पुलिस प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जाए, ताकि आम लोगों के बीच सुरक्षा का भरोसा और मजबूत हो।

साइबर अपराध पर विशेष जोर

बैठक के दौरान साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए एसपी ने सभी थाना प्रभारियों और पुलिस पदाधिकारियों को इस दिशा में विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, बैंकिंग धोखाधड़ी और सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाले अपराधों को लेकर लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जाए। साथ ही ऐसे मामलों में दर्ज कांडों की जांच को प्राथमिकता देकर पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने की दिशा में काम करने को कहा गया। अधिकारियों से यह भी कहा गया कि साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों का निपटारा तकनीकी समन्वय के साथ तेज किया जाए।

पेट्रोलिंग और निगरानी को और प्रभावी बनाने का निर्देश

कानून-व्यवस्था की स्थिति को और बेहतर बनाए रखने के लिए एसपी ने जिले में रात्रि गश्ती, वाहन चेकिंग और संवेदनशील इलाकों में पुलिस की सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि थाना स्तर पर अपराधियों, फरार आरोपियों और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाए। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय स्तर पर खुफिया संकलन को मजबूत करने और छोटी-छोटी सूचनाओं को भी गंभीरता से लेने को कहा गया। बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि पुलिस की नियमित उपस्थिति और सक्रिय निगरानी से अपराध की संभावनाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

अवैध शराब और खनन माफिया पर सख्ती

बैठक में अवैध शराब के निर्माण, बिक्री, भंडारण और अवैध खनन से जुड़े मामलों को भी प्रमुखता से उठाया गया। एसपी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत कार्रवाई की जाए। थाना प्रभारियों से कहा गया कि अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय तत्वों की पहचान कर लगातार छापेमारी अभियान चलाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत बनाकर ऐसे नेटवर्क पर प्रहार किया जाए, जो अवैध गतिविधियों के जरिए कानून-व्यवस्था और राजस्व दोनों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। अधिकारियों को यह भी हिदायत दी गई कि कार्रवाई सिर्फ औपचारिक न हो, बल्कि उसका ठोस और दिखने वाला परिणाम भी सामने आए।

ताजपुर के लोको पायलट हत्याकांड पर भी हुई चर्चा

बैठक के दौरान ताजपुर थाना क्षेत्र के हरपुर भिंडी गांव में हाल में हुई लोको पायलट हत्याकांड की भी विशेष रूप से समीक्षा की गई। इस मामले को गंभीर श्रेणी में रखते हुए पुलिस अधीक्षक ने संबंधित थाना प्रभारी को जल्द से जल्द आरोपितों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने और पूरे मामले के उद्भेदन में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह की संवेदनशील घटनाओं में त्वरित कार्रवाई और तथ्यपरक जांच बेहद जरूरी है, ताकि घटना के पीछे की पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके और दोषियों तक शीघ्र पहुंचा जा सके।

अनुमंडल स्तर पर पर्यवेक्षण तेज करने का निर्देश

दलसिंहसराय, पटोरी, रोसड़ा और सदर अनुमंडलों से जुड़े विभिन्न प्रतिवेदित कांडों की समीक्षा करते हुए एसपी ने अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों को पर्यवेक्षण कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सिर्फ प्राथमिकी दर्ज कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक केस की जांच, पर्यवेक्षण, साक्ष्य संकलन और चार्जशीट तक की पूरी प्रक्रिया पर नियमित निगरानी जरूरी है। बैठक में इस बात पर भी बल दिया गया कि जिन मामलों में अनुसंधान की गति धीमी है, वहां तत्काल समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।

कर्मयोगी एप, वारंट और लंबित कांडों पर फोकस

थाना प्रभारियों को प्रशासनिक और न्यायिक कार्यों में भी तेजी लाने के निर्देश दिए गए। एसपी ने कर्मयोगी एप पर प्रशिक्षण प्राप्त करने, सम्मन, कुर्की और एनबीडब्ल्यू वारंटों के निष्पादन में तेजी लाने को कहा। साथ ही 300 दिनों से अधिक समय से लंबित कांडों के शीघ्र निपटारे पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि लंबित मामलों की संख्या कम करना सिर्फ आंकड़ों का विषय नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था और पुलिस कार्यकुशलता से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए हर थाना अपने पुराने मामलों की सूची बनाकर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित करे।

थानों में रिकॉर्ड अपडेट रखने का आदेश

बैठक में थानों के अभिलेखों और कार्यालयी व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। एसपी ने निर्देश दिया कि सभी थानों में अपराध संबंधी अभिलेख जैसे सीडी पार्ट-1, 2, 3, गुंडा पंजी, फरारी पंजी, एमओ इंडेक्स, अल्फाबेटिकल रजिस्टर, लूट पंजी, डकैती पंजी और हाजत पंजी को अद्यतन रखा जाए। इसके साथ ही चरित्र सत्यापन, पासपोर्ट वेरिफिकेशन, सूचना का अधिकार, मानवाधिकार से जुड़े मामलों और वरीय अधिकारियों के कार्यालय से प्राप्त परिवादों की स्थिति की भी नियमित मॉनिटरिंग करने को कहा गया। डोसियर सत्यापन और नए डोसियर खोलने के कार्य को भी गंभीरता से लेने का निर्देश दिया गया।

महिला हेल्प डेस्क और लोक शिकायत निवारण पर भी जोर

एसपी ने थानों में विधि कोषांग, लोक शिकायत निवारण कोषांग और महिला हेल्प डेस्क के कार्यों को सुचारू ढंग से संचालित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आम लोगों की शिकायतों का संवेदनशील और त्वरित समाधान पुलिस की छवि और जनविश्वास दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। विशेषकर महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और कमजोर वर्गों से जुड़ी शिकायतों में थाना स्तर पर तत्परता और जवाबदेही स्पष्ट दिखनी चाहिए। बैठक में यह भी कहा गया कि पुलिसिंग का उद्देश्य सिर्फ अपराधियों पर कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों के बीच भरोसा कायम रखना भी है।

अपराध नियंत्रण के साथ जवाबदेही पर भी जोर

पूरी बैठक के दौरान यह स्पष्ट संकेत दिया गया कि जिले में अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस महकमा अब और अधिक परिणामोन्मुखी तरीके से काम करेगा। समीक्षा बैठक में सिर्फ अपराध के आंकड़ों पर नहीं, बल्कि कार्रवाई की गुणवत्ता, जांच की दिशा, लंबित मामलों की स्थिति और थाना स्तर की जवाबदेही पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को साफ संदेश दिया गया कि हर स्तर पर सक्रियता, पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई ही बेहतर पुलिसिंग की पहचान है। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में अपराध नियंत्रण, छापेमारी, वारंट निष्पादन और संवेदनशील मामलों की जांच में तेजी देखने को मिल सकती है।

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